मंगलवार, 26 नवंबर 2013

क्रांति के लिए ...!

उस  शिकायत  का
कोई  अर्थ  नहीं
जिसे  शासक-वर्ग  सुन  कर  भी
अनसुना  कर  दे

एक  व्यक्ति  की  आवाज़  का
यही  परिणाम  होता  है
अक्सर

क्रांति  के  लिए
एक  क्रांतिकारी  पार्टी  चाहिए
जन-जन  के  हृदय  में  पैठी  हुई
जिसकी  आवाज़
किसी  भी  रण-दुन्दुभि  से  तेज़  हो
जो  जब  उठे
तो  दिल  दहल  जाएं
सत्ताधीशों  के....

समझौता-परस्तों  के
सिर्फ़  जमावड़े  होते  हैं
छोटे-मोटे 
हित-साधन  के  लिए  !

क्रांति  चाहिए
तो  पार्टी  बनानी  ही  होगी
आत्म-बलिदानियों  की  !

                                            (2013)

                                      -सुरेश  स्वप्निल 

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