Google+ Badge

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

वे मारे जाते हैं ...

असली  खेल  तो  अब  शुरू  होगा
जब  शिकार  के  मांस  से
पेट  भर  चुकने  के  बाद
वापस  लौट  जाएगा  शेर
अपनी  कंदरा  में

उसके  बाद  बारी  आएगी   परजीवियों  की
सबसे  पहले
शिकार  को  घेर  कर  लाने  वाले
जंगली  कुत्तों  की
फिर  सियार
फिर  लोमड़ियां
फिर  गिद्ध....
एक-दूसरे  पर  झपटते
एक-दूसरे  का  मांस  नोंचते
कोई  नहीं  चाहता
दूसरे  को खाने  देना

यद्यपि, बड़ी  विचित्र  बात  है
कि  अपनी  पसन्द  के  हिस्से
खा  चुकने  के  बाद
सब  लौट  जाते  हैं
दूसरी  जाति  के  पशुओं  को
बचा-ख़ुचा  खाने  के  लिए  छोड  कर

एक  अलिखित  समझौता  है
सारे  मांसाहारियों  के  बीच
सबकी  अपनी-अपनी  बारी
सबके   अपने-अपने  हिस्से

जो  मारे  जाते  हैं
वे  शिकायत  नहीं   करते

या  इसे  यूं  भी  कहा  जा  सकता  है
कि  वे  मारे  जाते  हैं
जो  शिकायत  नहीं  करते  !

                                                       (2013)

                                                -सुरेश स्वप्निल

.

कोई टिप्पणी नहीं: