Google+ Badge

सोमवार, 18 नवंबर 2013

तुम्हारे हाथ के पत्थर ...!

चलो  बस  भी  करो
बातें  बहुत-सी  हो  चुकीं
आ  जाओ  अब
मैदान  में  ....

देखो
तुम्हारे  शत्रुओं  के  पास
क्या-क्या  है
नए  हथियार  हैं
तकनीक  है
रणनीतियां  हैं
सब  तरफ़  से  घेरने  को
ड्रोन  हैं
बम  हैं
रसायन  हैं
तुम्हें  अंधा  बनाने  को
तुम्हारे  घर  जलाने  को
तुम्हारे  हाथ-पांव  तोड़  कर
लाचार  करने  को
भयानक  सर्दियों  में
बर्फ़-सा  पानी
तुम्हारी  चेतना  का  सर  झुकाने  को ....

तुम्हारे  पास  भी  तो  है
बहुत-कुछ
स्वप्न  हैं  आकांक्षाएं  हैं
जलन  है  क्रोध  है
बेचैनियां  हैं  भावनाएं  हैं
सड़क  पर  ढेर  से  पत्थर  पड़े  हैं
हाथ  ख़ाली  हैं …

तुम्हारे  हाथ  के  पत्थर  बहुत  हैं
शत्रु-सेना  का
मनोबल  तोड़ने  को …!

                                                   ( 2013 )

                                             -सुरेश  स्वप्निल

.

1 टिप्पणी:

ana ने कहा…

bahut hi badhia wa arthpoorna....wah