Google+ Badge

रविवार, 17 मार्च 2013

बूढ़ी संसद नहीं चलेगी

युवा  देश  में  बूढ़ी  संसद  
नहीं  चलेगी

नहीं  चलेंगे  बूढ़ों  के  करतब
ज़्यादा  दिन
चोर-बाज़ारी, रिश्वत-ख़ोरी,
अमरीका  की  ठकुर-सुहाती
टाटा-बिड़ला-अम्बानी-मित्तल-जिंदल  से
गठ-बंधन  भी  नहीं  चलेंगे

अबकी  बार  हिसाब  मांगने  वाले
युवा-वर्ग  को
झांसे  देना  महंगा  होगा
अबके  जंतर-मंतर  से  बदलेगी  सारी  सत्ता,
सत्ता  के  सारे  समीकरण  यहीं  बनेंगे

अब  ज़्यादा  दिन  नहीं  बचे  हैं
इस  संसद  के
इस  अंधियारे  के  मौसम  के

अब  यह  संसद  नहीं  चलेगी
या  यह  जनता  नहीं  चलेगी !

                                                     ( 2013 )

                                                -सुरेश  स्वप्निल 

* एकदम नई रचना, अप्रकाशित, अप्रसारित। प्रकाशन हेतु उपलब्ध। 

1 टिप्पणी:

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

आपने सही कहा है अब ज्यादा दिन तक युवाओं को धोखा नहीं दिया जा सकता !!